सीतापुर में बरसात खत्म होने के बाद भी जर्जर सड़कों की हालत नहीं सुधरी है। शहर हो या गांव, हर जगह लोगों को टूटी और गड्ढों से भरी सड़कों से गुजरने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। बरसात में उखड़ी हुई डामर और जलभराव के कारण अब सड़कें सफर के बजाय परेशानी का पर्याय बन चुकी हैं।
शहर की प्रमुख सड़कों में से एक गुरुद्वारा रोड का निर्माण हाल ही में पूरा हुआ है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली है। लेकिन बाकी हिस्सों की स्थिति अब भी खराब है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों का निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं होता, जिसके चलते बारिश शुरू होते ही सड़कें दोबारा टूट जाती हैं।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए और जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए। शहर की मुंशीगंज, कैप्टन मनोज पांडे चौक से ताड़कनाथ मंदिर और मन्नी चौराहा जाने वाली सड़कें, सिटी स्टेशन और घंटाघर मार्ग समेत कई महत्वपूर्ण रास्ते बदहाल स्थिति में हैं। कई जगहों पर बने गहरे गड्ढे अब जानलेवा साबित हो रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में भी स्थिति कुछ बेहतर नहीं है। घटिया निर्माण और रखरखाव की कमी के चलते सड़कों की परतें उखड़ चुकी हैं। वाहन चालकों का कहना है कि इन सड़कों पर रोजाना सफर करना किसी जोखिम से कम नहीं है। खराब सड़कों के कारण गाड़ियों के टायर, सस्पेंशन और ब्रेक सिस्टम बार-बार खराब हो रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि समय-समय पर मरम्मत कार्य होता जरूर है, लेकिन वह टिकाऊ नहीं होता। कुछ महीनों में सड़कें फिर से टूटने लगती हैं। निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी और जल निकासी की खराब व्यवस्था मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
लोगों ने स्पष्ट कहा कि जब तक सड़क निर्माण की निगरानी और जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक स्थिति में सुधार की उम्मीद नहीं है। शहरवासियों ने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर सड़कों की मरम्मत शुरू करने की मांग की है, ताकि आवागमन सुचारु हो सके।
नगर निकाय अधिकारियों का कहना है कि शहर की कई सड़कों का निर्माण कार्य जारी है और जल्द ही अन्य सड़कों की मरम्मत भी शुरू की जाएगी। ईओ वैभव त्रिपाठी ने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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