Sitapur Ki News: सीतापुर के बिसवां तहसील क्षेत्र में गुरुवार को नहर टूटने की घटना ने किसानों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी। मानपुर से महमूदाबाद की ओर जाने वाली नहर, जिसकी हाल ही में खुदाई और सफाई कराई गई थी, अचानक दो स्थानों पर टूट गई।
नहर में करीब एक सप्ताह पहले ही पानी छोड़ा गया था, लेकिन प्रवाह बढ़ते ही मिट्टी का ढांचा कमजोर पड़ गया और पानी सीधे खेतों में भरने लगा। इस हादसे के कारण सैकड़ों बीघा गेहूं, सरसों और रबी की अन्य फसलें जलमग्न हो गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार खेतों में पानी भरते ही गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोग नहर किनारे जमा हुए और तुरंत इसकी सूचना विभागीय अधिकारियों को दी गई। किसानों ने आरोप लगाया कि नहर विभाग के जेई और जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे, बल्कि मरम्मत के लिए एक स्थानीय कर्मचारी भेज दिया गया। मौके पर पहुंची टीम ने जेसीबी की मदद से अस्थायी तौर पर बांध बनाकर पानी के बहाव को रोका, लेकिन नुकसान पहले ही बड़ा हो चुका था।
स्थानीय किसानों ने नहर टूटने के लिए विभागीय लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि खुदाई के दौरान गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, जिससे मिट्टी ढीली रह गई। वहीं कुछ ग्रामीणों ने कहा कि रात के समय वन्य जीवों की गतिविधियों से नहर कट गई, जिससे पानी दो दिशाओं में फैलना शुरू हुआ। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, मगर किसान इसे प्रमुख कारण मान रहे हैं।
नहर से खेतों में पानी घुसने के बाद किसान मुआवजे की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि हर साल इसी तरह कृषि भूमि प्रभावित होती है, लेकिन स्थायी समाधान के नाम पर कोई कार्रवाई नहीं होती। इस बार नुकसान बड़े पैमाने पर हुआ है, ऐसे में प्रशासन को तुरंत सर्वे कराकर मूल्यांकन करना चाहिए।
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स्थानीय लोगों ने चेताया कि यदि नहर मरम्मत और निगरानी प्रणाली को मजबूत नहीं किया गया, तो यह समस्या आगे भी बनी रहेगी। फिलहाल ग्रामीणों और किसानों की नजर प्रशासन के निर्णय और संभावित मुआवजा प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
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