Sitapur Ki News: सीतापुर में प्रशासन ने बिसवां तहसील क्षेत्र में शत्रु संपत्ति पर की जा रही अवैध खेती के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। शुक्रवार को पुरैना गांव में 432 बीघा भूमि को कब्जा मुक्त कर प्रशासनिक नियंत्रण में ले लिया गया। इस जमीन पर वर्षों से स्थानीय लोग फसल बो रहे थे, लेकिन इसे सरकारी रिकॉर्ड में शत्रु संपत्ति घोषित किया जा चुका था। कार्रवाई पूरी होने के बाद अब जिलाधिकारी कार्यालय इसकी विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजने जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, गांव के करीब 15 लोगों द्वारा इस भूमि पर गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों की बुवाई की गई थी। उपजिलाधिकारी शिखा शुक्ला के नेतृत्व में प्रशासनिक और राजस्व टीम मौके पर पहुंची और गाटा संख्या 506, 519, 520, 518, 517, 501 और 791 की नापजोख की गई। जांच में यह क्षेत्र शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज मिला। फसल हटाने की प्रक्रिया शुरू होते ही कुछ ग्रामीणों ने विरोध जताया और ऐतिहासिक संबंधों का हवाला दिया, हालांकि टीम ने राजस्व अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई जारी रखी।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना था कि उनके पूर्वज महमूदाबाद एस्टेट से जुड़े रहे हैं और भूमि पर खेती उनका पारंपरिक अधिकार रहा है। लेकिन राजस्व विभाग का स्पष्ट मत है कि शत्रु संपत्ति सरकारी नियंत्रण में आती है और इस पर निजी कब्जा अवैध माना जाता है। इसी आधार पर फसल को ट्रैक्टर से जोतवाकर जमीन कब्जा मुक्त की गई।
उपजिलाधिकारी ने कहा कि यह भूमि शासन के निर्देशानुसार आगे लीज पर उठाई जाएगी। इसके लिए गृह मंत्रालय की स्वीकृति के बाद खुली बोली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। प्रशासन का मॉडल पहले भी लागू हो चुका है—करीब दो वर्ष पूर्व रामपुर मथुरा में लगभग 200 बीघा भूमि इसी प्रारूप में कब्जा मुक्त कर नीलामी पर दी गई थी।
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जिला प्रशासन का कहना है कि ऐसी संपत्तियों को चिह्नित कर राजस्व संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि इन पर अवैध कब्जे और आर्थिक लाभ के प्रयास रोके जा सकें। रिपोर्ट गृह मंत्रालय भेजे जाने के बाद आगे की नीतिगत प्रक्रिया केंद्रीय स्तर पर तय होगी।
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