Hindi News: राजस्थान में SOG की बड़ी कार्रवाई, भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक

rajasthan sog recruitment fraud network
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Hindi News: राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं और मेडिकल सेक्टर को लंबे समय से प्रभावित कर रहे संगठित फर्जीवाड़े पर स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने बड़ा शिकंजा कस दिया है। हाल ही में लगातार तीन मामलों में की गई त्वरित कार्रवाई ने राज्य में सक्रिय व्यापक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो युवाओं के करियर और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर गहरा असर डाल रहा था। SOG की कड़ी कार्रवाई ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब एजेंसी इन रैकेटों को जड़ से खत्म करने के मिशन मोड में काम कर रही है।

पहला मामला 2021 की सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक से जुड़ा है। SOG ने जयपुर ग्रामीण से महेंद्र कुमार चौधरी को गिरफ्तार किया, जिसने सरगना विनोद रेवाड़ से आठ लाख रुपये में पेपर खरीदा था। जांच में सामने आया कि दोनों ने परीक्षा से एक दिन पहले सॉल्व्ड पेपर पढ़ा, जिसके आधार पर महेंद्र मेरिट तक पहुंच गया, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। इस केस में अब तक 133 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जो इस फर्जी नेटवर्क की गहराई और व्यापकता को दर्शाता है।

दूसरी कार्रवाई ग्रामसेवक भर्ती परीक्षा 2016 में डमी कैंडिडेट के खुलासे से जुड़ी है। SOG ने दस हजार रुपये के इनामी आरोपी लाडूराम बिश्नोई को गिरफ्तार किया, जिसने अपनी जगह गोपाल बिश्नोई नामक डमी को परीक्षा देने भेजा था। गोपाल को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन मुख्य आरोपी लाडूराम लंबे समय से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी के बाद इस केस की महत्वपूर्ण कड़ी भी जोड़ दी गई है, जिससे साबित होता है कि भर्ती धांधली का नेटवर्क वर्षों से सक्रिय था।

तीसरा और सबसे चिंताजनक मामला मेडिकल सेक्टर से जुड़ा है। SOG ने दौसा के तीन युवकों को गिरफ्तार किया, जो फर्जी NMC रजिस्ट्रेशन और जाली इंटर्नशिप सर्टिफिकेट का उपयोग कर विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे थे।

जांच में पता चला कि विदेश से MBBS कर लौटे इन छात्रों ने 16 लाख रुपये देकर फर्जी सर्टिफिकेट बनवाए थे, ताकि FMGE परीक्षा दिए बिना भारत में मेडिकल प्रैक्टिस कर सकें। SOG को संदेह है कि यह एक बड़ा गिरोह है, जो ऐसे कई विदेशी MBBS ग्रेजुएट को डॉक्टर बनाने के लिए फर्जी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर रहा था।

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इन तीनों मामलों ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में अपराधियों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो युवाओं की मेहनत और भविष्य से खिलवाड़ कर रहा था। SOG की लगातार की गई कार्रवाई से न केवल इन रैकेटों की पोल खुली है, बल्कि यह भी संकेत मिला है कि आगे और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। एजेंसी का कहना है कि इन मामलों के पीछे छिपे पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने के लिए जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।

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