Sitapur Ki News: सीतापुर में चार महीने बाद भी बंदरों के आतंक से राहत नहीं, शहर से गांव तक दहशत

monkey menace sitapur problems
5/5 - (1 vote)

Sitapur Ki News: सीतापुर में बंदरों के बढ़ते आतंक ने आमजन का जीना मुश्किल कर दिया है। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोग बंदरों के हमलों, तोड़फोड़ और उत्पात से दहशत में हैं। पिछले चार महीनों से लगातार शिकायतों और खबरों के बावजूद अभी तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। स्थानीय निवासी प्रशासन की निष्क्रियता पर नाराजगी जता रहे हैं और जल्द ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

बंदरों द्वारा काटे जाने की घटनाएं इतनी आम हो गई हैं कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन 15–20 मरीज एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे अधिक संख्या में होते हैं। ग्रामीण इलाके रामपुर मथुरा से लेकर पिसावां ब्लॉक तक लोग लगातार हमलों का शिकार बन रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि बंदर घरों की छतों, पार्कों और गलियों में झुंड बनाकर अचानक हमला कर देते हैं, जिससे रोजाना कई लोग गिरकर भी घायल होते हैं।

शहर के कई प्रमुख मोहल्ले—विजय लक्ष्मी नगर, आर्य नगर, घूरामऊ बंगला, सिविल लाइंस, तरीनपुर और मुंशीगंज—बंदर आतंक से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां बंदर कपड़े उड़ा ले जाते हैं, गमले तोड़ देते हैं, पक्षियों का दाना फेंक देते हैं और घरों के बाहर सामान नष्ट कर देते हैं। मंदिरों में भी श्रद्धालु लगातार परेशान हो रहे हैं। श्यामनाथ मंदिर, बिसवां का पत्थर शिवाला मंदिर, लहरपुर का जंगलीनाथ मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों पर बंदरों के हमले आम हो चुके हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रसाद चढ़ाना भी अब जोखिम भरा हो गया है।

नगर पालिका द्वारा अस्थायी रूप से लंगूरों की मदद से बंदरों को भगाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह उपाय केवल कुछ घंटों तक ही कारगर रहता है। जैसे ही लंगूर को हटाया जाता है, बंदर वापस आ जाते हैं और हालात फिर बिगड़ जाते हैं। कई स्थानों पर लोग अपने घरों में लंगूर के कटआउट भी लगा रहे हैं, जिससे थोड़ी राहत मिलती है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। स्थानीय लोगों ने कहा कि बंदरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और अब यह समस्या गंभीर रूप ले चुकी है।

WhatsApp चैनल फ़ॉलो करें

Sitapur की ताज़ा न्यूज़ अपडेट्स तुरंत अपने WhatsApp पर पाएं !

नगर पालिका अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि बंदर और आवारा जानवरों की समस्या चुनौतीपूर्ण है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए व्यापक अभियान और संसाधनों की जरूरत है। दूसरी ओर निवासी कह रहे हैं कि प्रशासन को पकड़ने का अभियान नियमित रूप से चलाना चाहिए, नहीं तो आने वाले समय में हालात और खतरनाक हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें: सीतापुर में पति की मौत के बाद संपत्ति विवाद में महिला से मारपीट

Share this post!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!