Sitapur Ki News: सीतापुर के रेउसा में स्थित बालाजी जच्चा-बच्चा केंद्र में प्रसूता की संदिग्ध मौत के मामले ने प्रशासन को सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। केंद्र के संचालक दीपक कुमार, चिकित्सक विनय कुमार और युवी सिंह के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। यह कार्रवाई एसडीएम बिसवां शिखा शुक्ला की रिपोर्ट के बाद हुई, जिसमें अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई थी।
थानगांव के चिरैंया गांव की रहने वाली गायत्री को रविवार को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रसव के बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी और परिजनों ने उसे लखनऊ रेफर किया, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल के सामने शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम डॉ. राजा गणपति आर ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की और रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए।
एसडीएम शिखा शुक्ला की जांच में सामने आया कि अस्पताल पंजीकृत होने के बावजूद बुनियादी मेडिकल रिकॉर्ड अधूरे थे। प्रसव का समय, बच्चे का वजन और दिए गए उपचार का विवरण उपलब्ध नहीं था। जांच में यह भी पाया गया कि ऑपरेशन के दौरान प्रसूता को दो यूनिट ब्लड चढ़ाया गया, लेकिन इसका कोई उल्लेख अस्पताल के दस्तावेजों में दर्ज नहीं था। देर रात मरीज को घबराहट और ऐंठन होने लगी, लेकिन उस समय अस्पताल में कोई ऑपरेटिंग डॉक्टर मौजूद नहीं था, जबकि मरीज को हाई रिस्क माना गया था।
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अस्पताल में डॉक्टर न होने की वजह से समय पर उचित इलाज उपलब्ध नहीं हो सका, जिससे स्थिति गंभीर होती गई। इसके बाद केंद्र संचालक ने मरीज को रेफर कर दिया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएनएस की धारा 106 के तहत मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। देर शाम पुलिस ने संचालक और दोनों चिकित्सकों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
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