Hindi News: बिहार के गया जंक्शन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता अर्जित की है। संयुक्त गश्त के दौरान दून एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 13010) के एक कोच से 102 जिंदा कछुए बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, बरामद कछुओं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 51 लाख रुपये तक हो सकती है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में कछुआ संरक्षित प्रजाति है और इसकी तस्करी गंभीर अपराध माना जाता है।
यह कार्रवाई गुरुवार रात करीब 10:30 बजे की गई, जब निरीक्षक प्रभारी बनारसी यादव और अपराध आसूचना शाखा के निरीक्षक चंदन कुमार के नेतृत्व में स्टेशन परिसर में गश्त चल रही थी। प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर खड़ी दून एक्सप्रेस के कोच एस-3 की जांच में पांच पिट्ठू बैग और एक झोला संदिग्ध मिले। इन्हें खोलने पर सभी बैगों से 102 जीवित कछुए पाए गए। पूछताछ के बावजूद किसी भी यात्री ने इन बैगों पर दावा नहीं किया।
कछुओं को जब्त करते हुए आरपीएफ टीम ने सभी को सुरक्षित पोस्ट लाया और तुरंत गया वन विभाग को सूचना दी। रेंज अधिकारी आरती कुमारी मौके पर पहुंचीं और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद कछुओं को संरक्षण और स्वास्थ्य जांच हेतु अपने कब्जे में लिया। विभाग अब इनके सुरक्षित पुनर्वास की कार्यवाही कर रहा है।
आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि रेल मार्ग वन्यजीव तस्करों के लिए अक्सर पसंदीदा माध्यम बन जाता है, क्योंकि इससे निगरानी से बचने की कोशिश की जाती है। हालांकि लगातार हो रही बरामदगियों से स्पष्ट है कि रेलवे सुरक्षा बल इस नेटवर्क पर सख्त नजर रखे हुए है। सिर्फ इस सप्ताह सोमवार को भी नेताजी एक्सप्रेस से 76 जिंदा कछुए बरामद किए गए थे।
SitapurCity.com की न्यूज़ अपडेट्स तुरंत अपने WhatsApp पर पाएं !
संयुक्त टीम का मानना है कि हालिया बरामदगियां बड़े अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करती हैं, जिसकी पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। रेलवे सुरक्षा बल ने स्पष्ट किया है कि रेल संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा के साथ–साथ वन्यजीव संरक्षण भी उसकी जिम्मेदारी में शामिल है, और ऐसी कार्रवाइयों से तस्करों के प्रयासों को कमजोर किया जाएगा।
यह भी पढ़ें: यमुना एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार का खतरनाक साल, 2025 में 65 से अधिक मौतें







