Hindi News: यमुना एक्सप्रेसवे पर 2025 सड़क सुरक्षा के लिहाज से एक भयावह साल साबित हो रहा है। तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण इस वर्ष अब तक 65 से अधिक लोगों की जान दुर्घटनाओं में जा चुकी है, जो पिछले दो वर्षों के मुकाबले लगभग दोगुना आंकड़ा है। एक्सप्रेसवे पर हादसे की बढ़ती रफ्तार ने पुलिस और प्राधिकरण दोनों की चुनौतियों को बढ़ा दिया है।
मथुरा जिले में लगभग 75 किलोमीटर लंबे इस रूट पर पहले पांच ब्लैक स्पॉट चिन्हित थे, जिनमें नौहझील क्षेत्र के चार और राया का एक स्थान शामिल था। लेकिन मंगलवार को एक बड़े हादसे में 19 लोगों की मौत के बाद बलदेव के माइल स्टोन–127 को भी आधिकारिक रूप से ब्लैक स्पॉट की सूची में शामिल कर लिया गया। यह स्थिति बताती है कि समय के साथ दुर्घटनाओं का दायरा बढ़ता जा रहा है।
रफ्तार इस संकट का बड़ा कारण बनकर उभरी है। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ इस वर्ष ओवर स्पीडिंग के 24 हजार से अधिक चालान काटे जा चुके हैं, लेकिन ड्राइवरों का व्यवहार अब भी नहीं बदल रहा। 2023 में जहां 54 हादसों में 38 मौतें हुईं, वहीं 2024 में 46 हादसों में 36 लोग मारे गए थे। इसके विपरीत 2025 में 60 से अधिक हादसे अब 65 जानें ले चुके हैं। यह बढ़ता ग्राफ साफ चेतावनी देता है कि यदि नियंत्रण नहीं बढ़ा, तो हालात और खराब हो सकते हैं।
सड़क सुरक्षा मानकों के अनुसार किसी भी स्थान पर तीन वर्षों में 10 हादसों में पांच या अधिक मौतें होने पर उसे ब्लैक स्पॉट की श्रेणी में रखा जाता है। इसके बाद वहां चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टर, लेन मार्किंग, झाड़ियां हटाने और स्पीड लिमिट को सख्ती से लागू करने जैसे उपाय किए जाते हैं। अधिकारियों के अनुसार नए चिह्नित स्थानों पर यह प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
इसी बीच आगरा–दिल्ली नेशनल हाईवे–19 पर भी दुर्घटनाओं का रुझान चिंताजनक है। वहां 19 ब्लैक स्पॉट दर्ज हैं और इस वर्ष अब तक 249 हादसों में 152 मौतें हो चुकी हैं। हालांकि 2023 के 189 मृत्यु वाले आंकड़े से कम है, फिर भी संख्या बेहद गंभीर मानी जा रही है। हाईवे पर चालान सिस्टम में हर माह लगभग 8 हजार ओवरस्पीड मामलों की जानकारी पुलिस तक पहुंचती है, लेकिन नियमानुसार 10% मार्जिन के भीतर मामलों को छोड़ा भी जाता है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि व्यवहारिक अनुशासन, सख्त प्रवर्तन और हाईवे प्रबंधन के बिना दुर्घटनाओं के इस दुष्चक्र से बाहर निकलना मुश्किल है। यमुना एक्सप्रेसवे पर बढ़ते हादसे अब सड़क इंजीनियरिंग, मॉनिटरिंग और चालक जागरूकता — तीनों की तत्काल समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
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