Hindi News: नोएडा में एसीपी-प्रथम प्रवीण कुमार सिंह की भाषाई दक्षता ने दो मासूम बच्चियों को उनके परिवार से मिलवाने में अहम भूमिका निभाई। शुक्रवार को पांच साल और डेढ़ साल की दो बच्चियां परिजनों से बिछड़ गई थीं, जिन्हें मिशन शक्ति टीम ने रोती हुई अवस्था में थाना सेक्टर-126 क्षेत्र में पाया। बच्चियों को सुरक्षित केंद्र पर ले जाया गया, जहां उनसे जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन भाषा न समझ पाने के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
पूछताछ के दौरान पता चला कि दोनों बच्चियां केवल बंगाली भाषा समझती हैं, जिसके चलते वे अपने माता-पिता का नाम, पता या अन्य जानकारी नहीं बता पा रही थीं। मिशन शक्ति टीम ने संवेदनशील तरीके से संवाद स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन भाषा बाधा के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी रही। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों को सूचित किया गया।
इसी दौरान गश्त के दौरान एसीपी-प्रथम प्रवीण कुमार सिंह मौके पर पहुंचे। उन्हें बच्चियों के बंगाली समझने की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने स्वयं उनसे बंगाली में संवाद किया। बच्चियों ने विश्वास बनते ही बताया कि वे हाजीपुर अंडरपास से आगे का रास्ता पहचान सकती हैं। एसीपी और पुलिस टीम बच्चियों को साथ लेकर बताए गए मार्ग पर निकले और लगभग 3 किलोमीटर दूर सेक्टर-133 स्थित लेबर कैंप पहुंचे।
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लेबर कैंप में बच्चियों के माता-पिता उन्हें ढूंढते हुए बेहद परेशान हाल में मिले। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने दोनों बच्चियों को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। यह पूरी प्रक्रिया लगभग 6 घंटे चली, जिसके बाद परिवार ने गौतमबुद्धनगर पुलिस और विशेष रूप से एसीपी प्रवीण कुमार सिंह का आभार व्यक्त किया। पुलिस ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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