Sitapur Ki News: सीतापुर में प्रतिबंधित कोडीनयुक्त कफ सीरप की अवैध सप्लाई और बिक्री का मामला उजागर होने के बाद जिले के स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि नगर क्षेत्र स्थित एक मेडिकल स्टोर से नशीले उद्देश्यों के लिए बड़ी मात्रा में सीरप बेचे गए थे। औषधि विभाग की रिपोर्ट के आधार पर स्टोर संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस अब आगे की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
पूरा मामला तब सामने आया जब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की सचिव डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर लखनऊ के एक थोक दवा विक्रेता की जांच की गई। इसके रिकॉर्ड में पाया गया कि विभिन्न जिलों में बड़ी मात्रा में कोडीनयुक्त सीरप भेजे गए थे, जिनमें सीतापुर का बालाजी फार्मा भी शामिल था।
जांच में यह इनपुट मिला कि 6300 शीशियों का स्टॉक यहां भेजा गया था। औषधि निरीक्षक अनीता कुरील ने तुरंत छापेमारी की, लेकिन स्टोर से एक भी शीशी बरामद नहीं हुई। स्टोर संचालक ने बिक्री के कागज़ दिखाकर दावा किया कि पूरा स्टॉक बिक चुका है।
जांच ने नया मोड़ तब लिया जब दस्तावेज़ों का सत्यापन किया गया। जिन दुकानों को सीरप बेचे जाने की बात कागज़ों में दर्ज थी, उनमें से कई अस्तित्व में ही नहीं मिलीं। जिन मेडिकल स्टोरों के नाम पर सीरप बिक्री दर्ज थी, उन्होंने लिखित में बताया कि उन्होंने ऐसा कोई स्टॉक न तो मंगाया और न ही खरीदा।
इससे स्पष्ट हुआ कि फर्जी बिलिंग कर अवैध रूप से कफ सीरप को कहीं और सप्लाई किया गया है। औषधि निरीक्षक के अनुसार, कोडीनयुक्त सीरप केवल डिग्रीधारक चिकित्सक के पर्चे पर ही बेचा जा सकता है, जबकि यहां यह नियम पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
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अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि हजारों शीशियां आखिर गई कहां? पुलिस के सामने यह जांच का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा है। नगर कोतवाल अनूप शुक्ल ने बताया कि स्टोर संचालक राजेश श्रीवास्तव की तलाश की जा रही है और उससे पूछताछ के बाद ही यह सामने आएगा कि प्रतिबंधित सीरप किसे और किन चैनलों के माध्यम से बेचे गए। पुलिस का कहना है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और पूरे नेटवर्क को ट्रेस करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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