Hindi News: संचार साथी ऐप को लेकर शुरू हुई बहस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे स्मार्टफोन में मौजूद ऐप्स वाकई हमारी निगरानी कर सकते हैं और पर्सनल डेटा चुरा सकते हैं। हाल ही में सरकार ने मार्च 2026 से सभी नए मोबाइलों में यह ऐप प्री-इंस्टॉल करने के अपने फैसले को वापस ले लिया। लेकिन इससे एक बड़ा मुद्दा फिर सामने आ गया—क्या हमारे फोन में मौजूद अन्य ऐप्स भी कुछ ऐसा कर रहे हैं जिसकी हमें खबर नहीं?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कई ऐप्स सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से उपयोगकर्ताओं का डेटा इकट्ठा करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर एक्सपर्ट विराग गुप्ता बताते हैं कि ऐप्स मुख्य रूप से लोकेशन, कॉन्टैक्ट लिस्ट, कैमरा, फोटो, कॉल लॉग, मैसेज, हेल्थ डेटा और माइक्रोफोन जैसी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच रखते हैं। इनमें से कई अनुमतियां ऐप की वास्तविक जरूरत से कहीं अधिक होती हैं, जिससे डेटा दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में डेटा ही सबसे कीमती संसाधन बन चुका है। गुप्ता के अनुसार, “आज ग्राहक ही प्रोडक्ट है। कंपनियों के लिए डेटा शेयरिंग बेहद महत्वपूर्ण और व्यावसायिक रूप से लाभकारी है।” इसलिए कई ऐप्स उपयोगकर्ता की जानकारी को एनालिटिक्स, विज्ञापनों और तृतीय पक्ष प्लेटफॉर्म को भेजते हैं, जो हमेशा सुरक्षित नहीं होता।
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खुद को सुरक्षित रखने के लिए विशेषज्ञ सबसे पहले सलाह देते हैं कि किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी और टर्म्स एंड कंडीशंस जरूर पढ़ें। साथ ही, ऐप किन-किन अनुमतियों की मांग कर रहा है, इसे भी जांचना बेहद जरूरी है। ऐसे ऐप्स से बचना चाहिए जो बिना जरूरत कैमरा, माइक्रोफोन या लोकेशन एक्सेस की मांग करते हैं। विश्वसनीय प्लेटफॉर्म से ही ऐप डाउनलोड करें और समय-समय पर फोन की परमिशन सेटिंग्स की समीक्षा करें।
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